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गुरुवार, 12 मार्च 2020

गौहत एक ऐसी पहाड़ी दाल जिसका औषधीय महत्त्व भी है।कहते हैं दाल के पानी का नियमित उपयोग पथरी के लिए  अचूक औषधि है। महाराष्ट्र में इस दाल को कुल्थी की दाल कहा जाता है।

फौरेस्ट साइड फार्म से आई औरगेनिक दालों का स्वाद बेहतरीन है।कल जब कुछ लोगों की फरमाइश में मैंने काली उड़द के साथ गौहत की दाल बनाई तो जिसने खाई उंगली चाटता रहा गया।(अपने मुंह मियां मिट्ठू)

पास्टा, नूडल्स खाने वाली प्रजाति ने भी जब दाल की वाहवाही की तो लगा रेसिपी साझा करुं।

एक कटोरी गौहत की दाल
तीन चौथाई साबुत उड़द
एक टमाटर
लहसुन १२ कलियां,अदरक एक इंच,तीन चार हरी मिर्च,एक प्याज, हल्दी, धनिया पाउडर,गर्म मसाला ,नमक और घी।

गौहत और उड़द को धोकर कुकर में डालें।एक कटा टमाटर,नमक स्वादानुसार,हल्दी, गर्म मसाला, धनिया पाउडर डालकर चार या पांच सीटी तक पाएं।गैस से उतार कर ठंडा होने रखें।

आठ कली लहसुन,एक प्याज,तीन चार हरी मिर्च,अदरक का पेस्ट बनाकर दाल में डाल दें। फिर लगभग चार सीटी दें।देख लें दाल पक गई है कि नहीं।यदि नहीं पटी तो दो तीन सीटी और दे दें।

अब एक कड़ाही में घी डालकर गरम करें ।हींग डालें,जीरा डालें।बची हुई लहसुन की कलियों को बारीक काटकर भूरा होने तक पकाएं । कुकर में बनी दाल को कड़ाही में डाल दें।एक दो उबाल आने तक पकने दें।हरा धनिया डालकर सजा दें।और बिना रुके गर्म गर्म चावल के साथ खाएं- खिलाएं।

पुनश्च: मैं खाना तोल मोल के बगैर अंदाज़ से बनाती हूं।आप अपने रिस्क पर बनाएं।

दालें : @forestside farm से मंगाई गई। शुद्ध औरगैनिक।

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