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शनिवार, 7 मार्च 2020

बनारस से वापसी

'सुखन रा नाजिशे-मीनू क्फुमाशी जे गुलबांगे-समाइश हाय काशी
बनारस राकसे-गुफ्रता चुनीनस्त हुनूज अज गंगे-चीनश बरजबीं अस्त’
(काशी की तारीफ का फल है कि मेरी शायरी को आसमान जैसा ऊंचा और हसीन लिबास मिला)

इसी बनारस को देखने की तमन्ना लिए निकले थे बनारस कि दो हर्फ लिखना - पढ़ना हम भी सीख जाएं।क्या चंद पलों में ये करामात हो सकती है?सो दिल की तमन्ना दिल में लिए चले आए।

बनारस मेरे लिए बिस्मिल्ला खां का शहर है, क्वीन्स कौलेज में पढ़ते प्रेमचंद का शहर ,अम्मा का बी एच यू,गंगा की आरती ,चाट,मगही पान है।

सारनाथ,बाबा विश्वनाथ दर्शन, संकटमोचन दर्शन,गंगा जी की भव्य  संध्या आरती,असि घाट और ढेर सारी खरीदारी।कैसे फुर्र हुए दिन पता ही नहीं चला।

बनारस के लोगों की आत्मीयता ने दिल लूट लिया।उषा दी,पुष्पा दी,वंदना के प्रेम से सराबोर वापसी तो हो गई पर दिल का एक कोना वहीं छूट गया।वंदना के हाथ के बने लजीज खाने को नहीं भूल सकते ।आते आते उषा दी ने  'खोइचा 'भी भरा ।इतने  अपनापे का कैसे शुक्रिया अदा करेंगे ।@pratima Sinha से मिलने फिर आया जाएगा। एयरपोर्ट में Om Prakash Singh जी  से मिलना सुखद आश्चर्य था।

फिर जल्द आना होगा बनारस।

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