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मंगलवार, 2 जून 2020

यादों के दस्तावेज़

१०-१२ पेज के पत्र ,लिखते हुए न हाथों में दर्द ,पढ़ते हुए न आंखों में दर्द। हां ,खुशी या गम के आंसू टप टप टपक कर अक्षरों को धब्बा जरूर बना देते थे।

ओ ओ आप ऐसी लैटर्स के जमाने के हो, हाथ में अंतर्देशीय और पोस्टकार्डस के पुलिंदे को देख बेटी ने मजाक बनाई।अब उसे क्या बताऊं,कितने इतिहास,कितने त्यौहार ,कितनी सीखें,कितना रोमांस,कितनी खुशियां,कितने सुख ,कितने दर्द छिपे होते थे इन पत्रों में।तकिए के नीचे , किताबों के भीतर,जेब में मुड़े जुड़े कागज ,समय की पूंजी।

पत्र लेखन का इतिहास बहुत प्राचीन है। दुनिया में कई महत्वपूर्ण पत्र लिखे गए। उनमें एक प्रसिद्ध पत्र शिला में लिखा पहला सबसे महत्वपूर्ण पत्र माना जाता है।पहला हस्तलिखित पत्र किंग हेनरी VIII ने अपनी प्रेमिका को लिखा जो बाद में उनकी दूसरी पत्नी बनीं।ग्यारह वर्षीय बालिका ग्रेस बेडेले का अब्राहिम लिंकन को लिखा पत्र इस क्रम में महत्त्वपूर्ण माना जाता है ।मेले से अपने पिताजी द्वारा लाए अब्राहिम लिंकन के चित्र को देखकर उसने यह लिंकन को  पत्र लिखा कि वह उन्हें एक दिन अवश्य राष्ट्रपति बने देखने की उम्मीद करती है।कहते हैं चार्ल्स डार्विन जो पत्र अपने घनिष्ठ मित्रों को लिखते थे और इन्हीं पत्रों में उन्होंने idea of evalution and natural selection के सिद्धांतों की चर्चा की थी।विंस्टन चर्चिल के जर्मन नाजियों को लिखे पत्र खासे चर्चित हुए जो २०१० में बहुत महंगे बिके।

महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, टैगोर आदि महत्वपूर्ण व्यक्तियों के पत्र खासे चर्चित रहे हैं और इतिहास की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।काफ्का,इलियट,रेणु,अज्ञेय ,पांडे बैचेन शर्मा,साहनी न जाने कितने महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं जिनके पत्र  खूब चर्चित रहे।

कहते हैं पत्र से आप पत्र लिखने वाले के व्यक्तित्व को जान सकते हैं ।और वो कहावत'मियां हम तो लिफाफे से खत के मजमूं को जान लेते हैं।'

आज न वो जमाना न वो रिश्ते न वो पत्र लिखने की परंपरा ।तुम  क्या जानो बच्ची कारूं के खजाने हैं ये पत्र।

#letter_writting

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