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मंगलवार, 19 जून 2012


1 june2012.......
अट्ठारह वर्ष यूँ ही गुज़र गए
 आज भी याद है कैसे
 नवेली दुल्हन बनकर आई 
 तुम्हारी आंगन में
कितना शरमाई थी 
कितना घबराई  थी न जाने
कैसे निभेगा जन्मों का साथ 
माँ ने कहा था  जब बांधी थी
 दुपट्टे में गांठ 
अब है निभाना ज़िन्दगी भर  साथ 
और तब से चाल रहे है साथ 
क़ि इतने वर्षों का संकलन 
इतने वर्षों का साथ 
इतनी ऋतुओं का आना और जाना 
न जाने कैसे गुज़र गए
 इतने वर्ष 
तुम्हारी हाथों की पकड़
 कभी कमज़ोर न हुई 
तुम्हारी  आंखों की चमक
 कभी फीकी न पड़ी 
बस अबोले से होंठ 
 करते रहे वादा
जो जन्मो का संगम है
 सदा है निभाना ..............

11 टिप्‍पणियां:

  1. ये एक मीठा सा वादा जीवन भर का ...
    बहुत ही उम्दा भाव हैं ...

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  2. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    पर भी पधारेँ।

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  3. bahut sundar pyaare ehsaason ko baakhoobi shbd baddh kiya ...vaah

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  4. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति!

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