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सोमवार, 6 फ़रवरी 2012


चेहरा 
अपने अक्स को छुपाया है 
कई तहों के बीच
प्याज़ की परतों के मांनिंद 
हर एक खुलती परत में
 नया अक्स नज़र आता है
कभी तन्हाई  कभी हंसी है होठों पे 
कभी आंसू कभी गमो की चादर ओढे 
कभी ललक तो कभी  ममता की छांह लिए
कभी  गुस्सा तो कभी आह लिए 
हर परत एक नया नगमा है 
ज़िन्दगी के गीत गाता जाता है 
कोई देखे तो अगर
 सबसे भीतर की परत 
बचपन  ही जैसे हर एक अक्स 
में नज़र आता है .......

6 टिप्‍पणियां:

  1. हर परत एक नया नगमा है ....
    सच कहा, जाने ऐसी कितनी परतें छुपाये है ये चेहरा...

    बहुत खूबसूरत कविता...

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  2. सूरज जल बरसायेगा
    चाँद के मुह में आग होगी
    रेगिस्तान में नदी होगी
    अब बरसात न होगी ...

    ऐसा समय जल्दी ही आने वाला है अगर इंसान नहीं जागा तो ...
    चेतावनी दे रही है रचना ...

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  3. अरे वाह ,,
    बहूत हि सुंदर , प्याज का बिंब लेकर जिंदगी के
    पहलू को दर्शाती बेहतरीन रचना है..
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है..
    mauryareena.blogspot.com

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